नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने हाल ही में मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए योग्यता मानदंडों में संशोधन किया है, जिससे MBBS छात्रों को पढ़ाने के लिए नॉन-मेडिकल ग्रेजुएट्स को भी अवसर मिलेंगे। अब, एमएससी और पीएचडी डिग्री वाले गैर-मेडिकल स्नातकों को एनाटॉमी, बायोकेमिस्ट्री और फिजियोलॉजी जैसे विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा।
मुख्य बिंदु:
- योग्यता मानदंडों में ढील: NMC ने असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए पीएचडी डिग्री को अनिवार्य नहीं किया है। अब, NET, SET या SLET पास होना न्यूनतम योग्यता होगी।
- नॉन-मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए अवसर: एमएससी और पीएचडी डिग्री वाले गैर-मेडिकल स्नातकों को मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा, विशेषकर एनाटॉमी, बायोकेमिस्ट्री और फिजियोलॉजी जैसे विषयों में।
- शिक्षकों की कमी को दूर करना: इन संशोधनों का उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को दूर करना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
हालांकि, कुछ मेडिकल प्रोफेशनल्स ने इन बदलावों पर चिंता व्यक्त की है, उनका मानना है कि इससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। वहीं, अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए आवश्यक है। (livehindustan.com)
इन बदलावों के माध्यम से, NMC ने मेडिकल शिक्षा में सुधार और शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।